खंड II · c. 1475–1500

नीतिपरक शतरंज

नीतिपरक शतरंज

मूल शीर्षक: Le Jeu des Eschés de la Dame moralisé

पंद्रहवीं सदी के अंत का यह अनाम फ़्रांसीसी रूपक एक ऐसी शतरंज की बाज़ी दिखाता है जिसमें मनुष्य की आत्मा का भाग्य तय होता है। एक धर्मनिष्ठ महिला शैतान का सामना करती है; बिसात संसार का रूप लेती है और मोहरों को सद्गुणों तथा दुर्गुणों के नाम मिलते हैं। ऊपर से सरल दिखने वाले मुकाबले के पीछे चुनाव की स्वतंत्रता, प्रलोभन और आत्मिक दृढ़ता पर विस्तृत विचार खुलता है।

पंद्रह अध्याय क्रमशः इस संघर्ष का अर्थ खोलते हैं। आत्मप्रेम और ईश्वरप्रेम, महत्त्वाकांक्षा, सद्भाव, सुखभोग, संयम, दिखावा और विनम्रता सक्रिय शक्तियाँ बनते हैं। शतरंज की चाल अलग-अलग नैतिक विचारों को एक कथा में बाँधती है: आक्रमण, रक्षा और मोहरे की हानि मनुष्य के आंतरिक जीवन की घटनाएँ बन जाते हैं।

पुस्तक दिखाती है कि मध्ययुग और पुनर्जागरण की सीमा पर शतरंज की सांस्कृतिक भाषा कितनी व्यापक थी। इसे अपने समय के धार्मिक चिंतन और साहित्यिक कल्पना के दस्तावेज़ की तरह पढ़ना चाहिए। संस्करण 1913 की हस्तलिखित प्रति पर आधारित है; स्रोत की अस्पष्टताएँ टिप्पणियों में चिह्नित हैं और व्याख्याएँ तथा बाज़ी का पुनर्निर्माण रूपक की शतरंजी संरचना समझने में सहायता करते हैं।

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